एक पति-पत्नी की जोड़ी ने बनाया इलाज, पहली बार एक मरीज़ ने अपने बच्चे का चेहरा देखा!

साइंस की दुनिया में एक बड़ी खुशखबरी! सालों से अंधेपन से जूझ रहे लोगों के लिए उम्मीद की किरण जागी है। 'लक्सटर्ना' नाम की जीन थेरेपी ने एक मरीज़ की ज़िंदगी बदल दी, और अब इसे दुनिया का सबसे बड़ा वैज्ञानिक सम्मान मिला है।
जीन थेरेपी 'लक्सटर्ना' की कहानी किसी फ़िल्म से कम नहीं है। डॉ. जीन बेनेट और डॉ. अल्बर्ट मैगुएर, ये पति-पत्नी की जोड़ी दशकों से इस बीमारी का इलाज खोजने में जुटी हुई थी। उन्होंने एक ऐसी जीन थेरेपी विकसित की जो सीधे रेटिना में जाकर खराब जीन को ठीक करती है। ये थेरेपी उन लोगों के लिए है जो 'इनहेरिटेड रेटिनल डिस्ट्रोफी' नाम की बीमारी से पीड़ित हैं, जिसमें धीरे-धीरे रोशनी चली जाती है। एक मरीज़ तो ये तक कह रहा था कि उसे सालों बाद अपने बच्चे का चेहरा साफ-साफ दिखाई दिया! सोचिए, ज़िंदगी कितनी बदल गई होगी!
“ये सिर्फ़ जीन थेरेपी नहीं, ये एक नई ज़िंदगी है!” – एक मरीज़
अब आप सोच रहे होंगे कि ये जीन थेरेपी कैसे काम करती है? दरअसल, हमारी आँखों में एक जीन होता है जो रोशनी को देखने में मदद करता है। कुछ लोगों में ये जीन खराब हो जाता है, जिसकी वजह से अंधेपन का खतरा बढ़ जाता है। 'लक्सटर्ना' थेरेपी में, एक स्वस्थ जीन को वायरस के ज़रिए आँखों में डाला जाता है। ये स्वस्थ जीन खराब जीन की जगह ले लेता है और रोशनी वापस लाने में मदद करता है। ये इलाज महंगा ज़रूर है, लेकिन अंधेपन से जूझ रहे लोगों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है।
'लक्सटर्ना' को अब दुनिया का सबसे बड़ा वैज्ञानिक सम्मान 'ब्रेकथ्रू प्राइज़ इन लाइफ साइंसेस' मिला है। ये सम्मान इस बात का सबूत है कि साइंस कितनी दूर तक जा सकती है। अब वैज्ञानिक इस थेरेपी को और बेहतर बनाने और इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही ये इलाज भारत में भी उपलब्ध हो जाएगा, और कई लोगों की ज़िंदगी में रोशनी आ जाएगी। ये सिर्फ़ एक इलाज नहीं, बल्कि एक नई उम्मीद है।
क्या आप जानते हैं? इंसान की आँखें लगभग 10 मिलियन अलग-अलग रंगों को पहचान सकती हैं!