अक्सेंचर और इन्फोसिस जैसी कंपनियों का वीडियो ट्विन से बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन विशेषज्ञों को चिंता है कि इसके कानूनी और नैतिक परिणाम क्या होंगे?

वीडियो ट्विन एक ऐसी तकनीक है जो कंपनियों को अपने कर्मचारियों की गिनती और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करती है।
अक्सेंचर और इन्फोसिस जैसी बड़ी कंपनियां वीडियो ट्विन का उपयोग करके अपने कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। यह तकनीक डिजिटल डुप्लिकेट से बनती है, जो कर्मचारियों के काम को सिम्युलेट करती है और उनकी क्षमताओं को मापने के लिए डेटा एकत्र करती है। लेकिन विशेषज्ञों को चिंता है कि इससे कानूनी और नैतिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
वीडियो ट्विन एक ऐसी तकनीक है जो कर्मचारियों को निष्क्रिय कर सकती है, लेकिन इसके कानूनी और नैतिक परिणाम क्या होंगे?
विशेषज्ञ कहते हैं कि वीडियो ट्विन का उपयोग करके कंपनियां अपने कर्मचारियों को निष्क्रिय कर सकती हैं और उन्हें 'सुपर वर्कर' बना सकती हैं। इससे कर्मचारियों को लगता है कि वे अपने काम को बेहतर ढंग से कर सकते हैं, लेकिन वास्तव में इससे उनका व्यक्तिगत जीवन प्रभावित हो सकता है।
एक अन्य चिंता यह है कि वीडियो ट्विन का उपयोग करके कंपनियां अपने कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन कर सकती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे कर्मचारियों को अपने अधिकारों का पता नहीं चलता है और वे अपने काम के बारे में जागरूक नहीं होते हैं।
आजकल वीडियो ट्विन का उपयोग करके कंपनियां अपने कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए 20% तक की बेहतरी हासिल कर रही हैं।